‘सड़क नहीं, जंगल बचाओ’— ऋषिकेश 7 मोड़ पर पेड़ों की कटाई के खिलाफ AAP का हल्ला बोल, धामी सरकार पर्यावरण विरोधी

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मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।

वन विभाग रायपुर रेंज चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।

अपर यमुना वन प्रभाग चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वनों को अग्नि से सुरक्षा

वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान
वन विभाग अपील
जंगलों में आग को लेकर चेतावनी
जंगलों की आग रोकथाम
वन विभाग संदेश

ऋषिकेश हाईवे 7 मोड़ सड़क चौड़ीकरण के लिए पेड़ों की अवैध व अनियोजित कटाई के खिलाफ चल रहे जनांदोलन को AAP ने दिया समर्थन।

“ऋषिकेश 7 मोड़ चौड़ीकरण में जंगल कटान – धामी सरकार पर्यावरण विरोधी” – AAP

देहरादून: आम आदमी पार्टी ने ऋषिकेश में 7 मोड़ क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर हो रहे अंधाधुंध जंगल कटान को लेकर धामी सरकार पर “पर्यावरण विरोधी” होने का आरोप लगाया है।

प्रदेश अध्यक्षा उमा गौड़ सिसोदिया ने मौके पर जंगल कटान के विरोध में चल रहे जनांदोलन को अपना समर्थन दिया।

उन्हो ने कहा कि 7 मोड़ से लेकर नीलकंठ मार्ग तक हजारों की संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं। ये वही जंगल है जो ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्र को ऑक्सीजन देता है, भू-स्खलन रोकता है और पर्यावरण को बचाता है। सरकार विकास के नाम पर देवभूमि को रेगिस्तान बना रही है।

आप नेता ने कहा कि भाजपा सरकार को पर्यावरण से कोई लेना-देना नहीं है। एक तरफ एक पेड़ मां के नाम पर ‘वृक्षारोपण’ के बड़े-बड़े होर्डिंग लगते हैं, दूसरी तरफ रातों-रात सैकड़ों पेड़ काट दिए जाते हैं। ये चौड़ीकरण नहीं, विनाश है।”

उन्होंने कहा की चौड़ीकरण से पहले पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और जन सुनवाई नहीं कराई गई। और हरे भरे वृक्षों को काटने से पहले 10 गुना वृक्षारोपण की अनिवार्यता का पालन नहीं हुआ। बरसात के समय वृक्ष न काटे जाने के नियमों की भी अनदेखी की गई ज्ञात हो

की जंगल में निवास करने वाले बंदर, हिरन और अन्य वन्य जीवों का आवास है। उनके लिए कोई वैकल्पिक रास्ता या व्यवस्नथा नहीं की गई, जिस कारण जंगली जानवरों और मनव में संघर्ष बढ़ता जा रहा है। पहले से ही यह क्षेत्र जंगली हाथियों के कारण संवेदनशील रहा है।

कई बार हाथियों के हमले से लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी है, और अब चौड़ीकरण के नाम पर हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं जिससे यह क्षेत्र हाथियों के सड़क पर आ जाने से खतरनाक हो सकता है।

प्रदेश अध्यक्षा ने कहा कि उत्तराखण्ड पर्यावरण हरयाली बाग बगीचों के लिए जाना जाता है परन्तु सरकार विकास के नाम पर प्रदेश का विनाश करने पर तुली है।

प्रदेश के पहाड़ी जिलों में जंगल की कटाई से बरसात के मौसम में भूस्खलन और बाढ़ का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। पिछले कई वर्षों से बरसात के समय भूस्खलन बदल फटना नदियों के उफान पर आ जाने पर गांव के गांव तबाही का शिकार हो जाते हैं। पर सरकार को ये विनाश दिखाई नहीं देता, इसके विपरीत सरकार लगातार विकास और सड़क चौड़ीकरण के नाम पर लाखों पेड़ो की बाली लेने पर उतारू है।

मीडिया प्रभारी विपिन खन्ना ने कहा कि “सरकार टूरिज्म के नाम पर पहाड़ों को खोखला कर रही है। सड़क चौड़ी हो, पर जंगल बचाकर। हमें विकास चाहिए पर पर्यावरण की कीमत पर नही।

आप कार्यकर्ताओं ने सात मोड शेत्र में में जंगल कटान पर तत्काल रोक लगाने की मांग करते हुवे कहा की पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो। साथ ही सरकार अब तक कटे हर पेड़ के बदले 50 पेड़ लगाने की गारंटी दे और

सड़क चौड़ीकरण का वैकल्पिक प्लान बनाकर पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों से राय ले।

सात मोड शेत्र में जन आन्दोलन को समर्थन देने वालों में आप नेता श्याम बाबू पाण्डेय, पंकज अरोड़ा, नासिर खान जितेन पंथ हिमांशु पुण्डीर के साथ अन्य कार्यकर्ता भी शामिल थे।

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