23 महीने बाद आज़म ख़ान को मिली रिहाई, सीतापुर जेल से बाहर निकले सपा नेता

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मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।

वन विभाग रायपुर रेंज चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।

अपर यमुना वन प्रभाग चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वनों को अग्नि से सुरक्षा

वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान
वन विभाग अपील
जंगलों में आग को लेकर चेतावनी
जंगलों की आग रोकथाम
वन विभाग संदेश

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आज़म ख़ान को आखिरकार 23 महीने बाद सीतापुर जेल से रिहाई मिल गई। शुक्रवार सुबह जैसे ही जेल के दरवाज़े खुले, सपा नेता के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। लंबे समय से उनकी रिहाई का इंतज़ार कर रहे कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया।

आज़म ख़ान पर दर्ज कई मामलों के चलते उन्हें पिछले दो साल से अधिक समय से जेल में रहना पड़ा था। हालांकि उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय से राहत मिलने के बाद अब वे जेल से बाहर आ पाए हैं। उनकी रिहाई को लेकर समर्थकों ने इसे लोकतंत्र की जीत करार दिया है और कहा है कि यह सच्चाई और न्याय की जीत है।

सीतापुर जेल से बाहर आने के बाद आज़म ख़ान ने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत की। उन्होंने कहा कि जेल की सज़ा ने उन्हें और मज़बूत किया है और वे अब जनता की सेवा में और अधिक मजबूती से खड़े होंगे। साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि उनके धैर्य और समर्थन ने उन्हें मुश्किल समय में संबल दिया।

समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी आज़म ख़ान की रिहाई को ऐतिहासिक पल बताया। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिस तरह से उनके खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र रचे गए, उसके बावजूद न्याय की जीत हुई है। रिहाई के बाद उनके सक्रिय राजनीति में लौटने से सपा को मज़बूती मिलेगी।

गौरतलब है कि आज़म ख़ान के खिलाफ जमीन कब्जे और धोखाधड़ी समेत कई मामले दर्ज थे। इन मामलों में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार उन्हें राहत मिली। अब राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है कि रिहाई के बाद उनकी भूमिका उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्या होगी और आने वाले चुनावों में वे किस तरह सक्रिय होंगे।

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