मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।
जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।
जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।
पिरान कलियर। विश्व प्रसिद्ध दरगाह हज़रत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक से जुड़ा एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। वीडियो को लेकर विभिन्न तरह के दावे किए जा रहे हैं, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। दरगाह प्रबंधन अथवा संबंधित अधिकारियों की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि मजार शरीफ पर श्रद्धालुओं द्वारा अकीदत के साथ चढ़ाई गई चादर को एक कर्मचारी द्वारा हटाकर कुछ लोगों को ओढ़ाया गया। यदि जांच में यह दावा सही पाया जाता है, तो यह दरगाह की परंपराओं, व्यवस्थाओं और नियमों को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है। वहीं यदि वीडियो भ्रामक, अधूरा या संपादित पाया जाता है, तो प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि वह तत्काल तथ्य सार्वजनिक कर अफवाहों पर विराम लगाए।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि दरगाह में चढ़ाई जाने वाली चादरों और अन्य चढ़ावे के संबंध में वर्षों से निर्धारित नियम एवं परंपराएं लागू हैं, जिनका पालन बिना किसी भेदभाव के होना चाहिए। ऐसे में वायरल वीडियो की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर सच्चाई सामने लाना आवश्यक है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि दरगाह साबिर पाक करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। इसलिए इस तरह के संवेदनशील मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही न केवल जनभावनाओं को आहत कर सकती है, बल्कि अफवाहों को भी जन्म दे सकती है। उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम के समय की CCTV फुटेज सुरक्षित रखकर उसकी जांच कराई जाए और सभी संबंधित पक्षों से पूछताछ की जाए।
लोगों ने उत्तराखंड वक्फ बोर्ड और दरगाह प्रबंधन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी कर्मचारी की लापरवाही, नियमों के उल्लंघन या अनुचित आचरण की पुष्टि होती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। वहीं यदि वायरल वीडियो तथ्यहीन या भ्रामक साबित होता है तो प्रशासन आधिकारिक रूप से इसकी जानकारी सार्वजनिक करे, ताकि श्रद्धालुओं के बीच फैली भ्रांतियां दूर हो सकें।
