मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।
जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।
जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।
देहरादून: जहां अवैध तरीके से भारत में घुसपैठ करने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में रहने की अनुमति नहीं है और जो भी अवैध तरीके से रह रहे हैं उन पर कार्यवाही का आदेश है। तो वहीं इस बीच गैर हिंदू /रोहिंग्या मुसलमानो को लेकर समस्त ग्राम सभाओ, जनपद रुद्रप्रयाग की आज्ञा से एक चेतावनी जारी की गई है। इस चेतावनी में एक पोस्टर जारी करते हुए कहा गया है कि गैर हिंदू/ रोहिंग्या मुसलमानो वा फैरी वालों का गांव में व्यापार करना और घूमना वर्जित है। आगे कहा गया है कि यदि गांव में कहीं भी कोई गैर हिंदू /रोहिंग्या मुसलमान कहीं भी फेरी करता या गांव में कहीं भी मिलता है तो उनके खिलाफ दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अगर रोहिंग्या मुसलमानो के लिए जारी किए गए इस पोस्टर की बात जाए तो अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि यह चेतावनी आखिर कौन से रोहिंग्या मुसलमान को लेकर जारी की गई है? क्या इस चेतावनी को लेकर सरकार द्वारा कोई आदेश दिया गया है या फिर बिना आदेश के यह पोस्टर जारी किया गया है? यह चेतावनी सरकार द्वारा बसाए जा रहे रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर जारी की गई है तो बड़ा सवाल यह है कि भारत में शरणार्थी के रूप में रहने वाले रोहिंग्या मुसलमान को लेकर इस तरह की चेतावनी क्यों जारी की गई है जबकि सरकार द्वारा स्वयं ही इन रोहिंग्या मुसलमानो को शरणार्थियों के रूप में भारत में शरण दी जा रही हैं। तो फिर समस्त ग्राम सभा जनपद रुद्रप्रयाग की आज्ञा से इस तरह की चेतावनी को जारी करवाना कौन सी मानसिकता है?
भारतीय गृह मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, भारत के विभिन्न भागों में लगभग 40,000 रोहिंग्या मुसलमान बिना किसी दस्तावेज़ के शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं। सरकार का दावा है कि उनमें से लगभग 10,000 जम्मू और कश्मीर में रहते हैं, जबकि बाकी दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान आदि में फैले हुए हैं
