सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: गोद लेने वाली माताओं को भी मिलेगा पूरा मातृत्व अवकाश

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वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।

वन विभाग रायपुर रेंज चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।

अपर यमुना वन प्रभाग चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वनों को अग्नि से सुरक्षा

वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान
वन विभाग अपील
जंगलों में आग को लेकर चेतावनी
जंगलों की आग रोकथाम
वन विभाग संदेश

उत्तराखंड।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि गोद लेने वाली माताओं को पूर्ण मातृत्व अवकाश का अधिकार है, चाहे गोद लिए गए बच्चे की उम्र 3 महीने से ज्यादा की क्यों न हो। जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस महादेवन की बेंच ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 60(4) को असंवैधानिक घोषित करते हुए कहा कि गोद लेने वाली मां को केवल 3 महीने से कम उम्र के बच्चे के मामले में ही मातृत्व लाभदेने का प्रावधान करती है।

कोर्ट ने कहा कि 3 महीने से अधिक उम्र के बच्चे को अपनाने वाली महिला की मातृत्व से जुड़ी जिम्मेदारियां 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को अपनाने वाली महिला की जिम्मेदारियों जैसी ही हैं। इसलिए गोद लेने वाली मां को 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए। फैसले में कोर्ट ने केंद्र सरकार से पितृत्व अवकाश को सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता देने वाला कानून लाने का भी आग्रह किया है।

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