ऐतिहासिक निर्णय: अब ‘महर्षि वाल्मीकि चौक’ के नाम से जाना जाएगा देहरादून का ‘लैंसडाउन चौक’

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मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।

वन विभाग रायपुर रेंज चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।

अपर यमुना वन प्रभाग चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वनों को अग्नि से सुरक्षा

वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान
वन विभाग अपील
जंगलों में आग को लेकर चेतावनी
जंगलों की आग रोकथाम
वन विभाग संदेश

देहरादून। राजधानी देहरादून के इतिहास में आज का दिन गौरवशाली अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। वाल्मीकि समाज की आस्था और अस्मिता का सम्मान करते हुए, प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के ‘लैंसडाउन चौक’ का नाम बदलकर ‘महर्षि वाल्मीकि चौक’ करने का ऐतिहासिक अनुमोदन प्रदान कर दिया है।

इस पावन अवसर पर मण्डल अध्यक्ष (अम्बेडकर नगर मण्डल) संयम कुमार ने जॉली ग्रांट एयरपोर्ट स्थित मुख्य अतिथि गृह (Guest House) में मुख्यमंत्री से भेंट की। संयम कुमार ने मुख्यमंत्री के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते हुए अत्यंत आत्मीयता के साथ उनकी जेब में कलम (पेन) लगाकर उन्हें भेंट स्वरूप अर्पित की। साथ ही, उन्होंने मुख्यमंत्री को पगड़ी और शॉल भेंट कर समाज की ओर से उनका भव्य अभिनंदन किया।

उपाध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना का जताया आभार:

इस उपलब्धि पर संयम कुमार ने राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष (राज्य मंत्री स्तर) भगवत प्रसाद मकवाना का विशेष रूप से धन्यवाद और आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि मकवाना के कुशल मार्गदर्शन और समाज के हितों के लिए उनके निरंतर प्रयासों के कारण ही आज यह ऐतिहासिक सपना साकार हो पाया है।

संयम कुमार ने कहा:

“मुख्यमंत्री का यह निर्णय वाल्मीकि समाज के लिए एक अनमोल उपहार है। मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता और भगवत प्रसाद मकवाना के सतत सहयोग से समाज को यह अभूतपूर्व सम्मान मिला है। ‘महर्षि वाल्मीकि चौक’ अब हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा।”

इस अवसर पर राष्ट्रीय वाल्मीकि क्रांतिकारी मोर्चा के विभिन्न पदाधिकारी और वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया।

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