मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।
जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।
जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।
धारा 376 IPC के मामले में अभियुक्त दोषमुक्त
देहरादून।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/एफटीएससी (POCSO), देहरादून की अदालत ने सत्र परीक्षण संख्या 113/2024, थाना पटेलनगर, देहरादून में धारा 376 IPC के अंतर्गत विचाराधीन अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया।
प्रकरण में अभियुक्त की ओर से अजय कुमार बड़ोनी, Chief Legal Aid Defense Counsel द्वारा प्रभावी एवं पैरवी की गई। बचाव पक्ष ने माननीय न्यायालय के समक्ष अभियोजन द्वारा प्रस्तुत मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का गहन परीक्षण करते हुए अभियोजन के आरोपों की प्रमाणिकता पर विधिक आधारों के साथ अपना पक्ष रखा।
न्यायालय द्वारा मामले में प्रस्तुत समस्त साक्ष्यों, गवाहों के बयानों तथा उपलब्ध दस्तावेजी एवं चिकित्सीय साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया गया। न्यायालय के समक्ष अभियोजन के कथनों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के मध्य पाई गई महत्वपूर्ण परिस्थितियों तथा आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के अभाव का भी परीक्षण किया गया।
न्यायालय ने विवाह के कथित झांसे से संबंधित आरोपों के संबंध में विधिक स्थिति का परीक्षण करते हुए यह भी विचार किया कि क्या अभियोजन यह सिद्ध कर पाया है कि विवाह का वादा प्रारंभ से ही झूठा था और अभियुक्त का विवाह करने का कोई वास्तविक इरादा नहीं था।
मामले में कथित धनराशि, मारपीट, धमकी एवं अन्य आरोपों के संबंध में भी उपलब्ध साक्ष्यों का न्यायालय द्वारा मूल्यांकन किया गया। न्यायालय ने समग्र साक्ष्य के आधार पर पाया कि अभियोजन आरोपों को आवश्यक विधिक स्तर पर संदेह से परे सिद्ध करने में सफल नहीं रहा।
फलस्वरूप न्यायालय द्वारा अभियुक्त को धारा 376 IPC के आरोप से दोषमुक्त किए जाने का निर्णय पारित किया गया। निर्णय 31 अगस्त 2026 को खुले न्यायालय में सुनाया गया।
यह निर्णय एक बार पुनः इस महत्वपूर्ण विधिक सिद्धांत को रेखांकित करता है कि आपराधिक मामलों में अभियोजन को अपने आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करना आवश्यक है तथा मात्र आरोप अथवा संदेह के आधार पर आपराधिक दोषसिद्धि नहीं की जा सकती।
प्रकरण में अभियुक्त की ओर से अजय कुमार बड़ोनी, Chief Legal Aid Defense Counsel, देहरादून द्वारा पैरवी की गई।
