अपने बच्चे से मिलने के लिए तड़प रही पीडिता पहुंची महिला आयोग, लगाई ये गुहार

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वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।

वन विभाग रायपुर रेंज चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।

अपर यमुना वन प्रभाग चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वनों को अग्नि से सुरक्षा

वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान
वन विभाग अपील
जंगलों में आग को लेकर चेतावनी
जंगलों की आग रोकथाम
वन विभाग संदेश

देहरादूनः उत्तराखंड राज्य महिला आयोग के कार्यालय में एक पीड़िता न्याय की गुहार लगाते हुए पहुंची जिसने जानकारी में बताया कि उसके पति द्वारा उसके दो वर्ष के बच्चे को उससे दूर कर दिया गया है। वह पिछले एक हफ्ते से अपने बच्चों से मिलने के लिए तड़प रही है परंतु उसके पति द्वारा उसको उसके बच्चे से नहीं मिलाया जा रहा है।

पीड़िता ने आयोग अध्यक्ष के समक्ष न्याय की गुहार लगाते हुए जानकारी में बताया कि आपसी कलह के कारण पति द्वारा इस प्रकार के घटना को अंजाम दिया गया। मेरा बच्चा अभी 2 साल का भी पूरा नही हुआ है जिसे माँ के दूध की अत्यंत आवश्यकता है, परंतु मेरा पति मुझे मेरे बच्चे से मिलने नहीं दे रहा है। मेरा पति 31 मई को मुझसे मेरा बच्चा चुपचाप छिपा कर कहि ले गया है और इतने दिनों से मुझे मेरे बच्चे से नही मिलाया जा रहा है।

मामले में आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने त्वरित कार्यवाही करते हुए एसपी देहरादून को निर्देशित किया है कि शीघ्र अतिशीघ्र उक्त पीड़ित मां को उसका बच्चा सकुशल वापिस दिलाया जाए ताकि उसकी माँ उसे स्तनपान करा सके, जो कि बच्चे का भी अधिकार है और पीड़ित माँ का भी।

उन्होंने कहा की हिंदू अल्पसंख्यक और संरक्षकता अधिनियम, 1956 के सेक्शन 6 के अनुसार, 5 वर्ष से कम आयु के हिंदू बच्चे को माता की देखरेख में रखा जाता है क्योंकि इस उम्र में केवल माँ ही बच्चे को उचित भावनात्मक, शारीरिक, नैतिक सहारा दे सकती है। कानून व अधिकारों के अनुसार 7 वर्ष से कम आयु के बच्चे को कोई भी उसकी माँ से अलग नही कर सकता है और हमारा कानून इस अपराध की अनुमति नही देता है।

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