दरगाह की गोलक में कथित गड़बड़ी का मामला फिर सुर्खियों में, कार्रवाई पर उठे सवाल; SIT जांच की मांग

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वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।

वन विभाग रायपुर रेंज चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।

अपर यमुना वन प्रभाग चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वनों को अग्नि से सुरक्षा

वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान
वन विभाग अपील
जंगलों में आग को लेकर चेतावनी
जंगलों की आग रोकथाम
वन विभाग संदेश

दरगाह की गोलक में कथित गड़बड़ी का मामला फिर सुर्खियों में, कार्रवाई पर उठे सवाल; SIT जांच की मांग

रिपोर्ट शाहनवाज खान

पिरान कलियर/विश्व प्रसिद्ध दरगाह हज़रत मक़दूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर कलियरी रहमतुल्लाह अलैह में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और चढ़ावे की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। गोलक गिनती के दौरान कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़े पुराने मामले को लेकर अब विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और मुकदमा दर्ज करने की मांग उठने लगी है।

हरिद्वार के अधिवक्ता अरुण भदौरिया, कमल भदौरिया तथा एलएलबी छात्र चेतन भदौरिया ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार को शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि विभागीय जांच में तथ्यों की पुष्टि हुई थी और संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति भी की गई थी, तो फिर आज तक आपराधिक मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया।

शिकायत के अनुसार 11 जुलाई 2025 को साबरी गेस्ट हाउस, पिरान कलियर में दरगाह की गोलकों की गिनती का कार्य चल रहा था। उस समय तहसील प्रशासन, अमीन, लेखाकार तथा अन्य जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद थे। आरोप है कि गिनती प्रक्रिया के दौरान तैनात एक सुपरवाइजर ने कथित रूप से गोलक से निकली कुछ धनराशि अपनी जेब में रख ली। मामला अधिकारियों की नजर में आने पर उनसे स्पष्टीकरण और तलाशी की बात कही गई, लेकिन वह मौके से चले गए।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि घटना की सूचना तत्कालीन एसडीएम रुड़की को दी गई थी, जिसके बाद संबंधित अधिकारी से लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा गया। प्राप्त जवाब को संतोषजनक न मानते हुए कार्रवाई की संस्तुति किए जाने की बात सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों में सामने आने का दावा किया गया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि यदि जांच में अनियमितता के संकेत मिले थे और कार्रवाई की सिफारिश भी की गई थी, तो फिर मामला फाइलों तक सीमित क्यों रह गया? क्या किसी प्रभाव, दबाव या संरक्षण के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई? यह सवाल दरगाह प्रशासन की कार्यप्रणाली और जवाबदेही दोनों पर चर्चा को जन्म दे रहा है।

अधिवक्ताओं ने एसएसपी से मांग की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, संबंधित अभिलेखों की समीक्षा की जाए तथा यदि आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाएं तो मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए SIT गठित करने की भी मांग की गई है।

दरगाह जैसी धार्मिक और आस्था से जुड़ी संस्था में दानराशि से संबंधित किसी भी प्रकार के आरोप न केवल प्रशासनिक बल्कि जनविश्वास से जुड़े मुद्दे बन जाते हैं। ऐसे में अब सभी की निगाहें पुलिस प्रशासन और संबंधित विभागों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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