उत्तराखंड के 13वें डीजीपी बने दीपम सेठ, संभाला पदभार

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मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।

वन विभाग रायपुर रेंज चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।

अपर यमुना वन प्रभाग चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वनों को अग्नि से सुरक्षा

वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान
वन विभाग अपील
जंगलों में आग को लेकर चेतावनी
जंगलों की आग रोकथाम
वन विभाग संदेश

देहरादूनः उत्तराखंड में आईपीएस दीपम सेठ ने डीजीपी का पदभार संभाल लिया है। गार्ड ऑफ ऑनर के साथ डीजीपी दफ्तर में उनका स्वागत किया गया। कई अधिकारियों ने उन्हें इसके लिए बधाई दी है। दीपम सेठ ने प्रदेश की मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से मुलाकात भी की है। डीजीपी बनने के बाद दीपम सेठ ने कहा कि वह प्रदेश में कानून और व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए काम करेंगे और उनका फोकस जनता की समस्याओं के निस्तारण पर होगा। यातायात को लेकर भी वह बेहतर प्लान बनाने पर काम करेंगे।

बता दें कि 1995 बैच के आईपीएस अधिकारी उत्तराखंड के 13वें डीजीपी हैं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटकर सोमवार को उन्होंने अपना कार्यभार ग्रहण किया है। साल 2019 से वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे। अवधि पूरा होने से पहले उन्होंने अपने मूल कैडर में वापसी की थी। इसके ठीक बाद उन्हें प्रदेश पुलिस के मुखिया की जिम्मेदारी दे दी गई। पिछले साल प्रदेश के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार के रिटायरमेंट के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। तब तक अभिनव कुमार कार्यवाहक डीजीपी का पद संभाल रहे थे।

उत्तराखंड के डीजीपी बने दीपम सेठ उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने बिट्स पिलानी से इंजिनियरिंग की पढ़ाई की है। 1986 से 90 तक उन्होंने अपनी इंजिनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी से उन्होंने मास्टर्स की डिग्री पुलिस मैनेजमेंट में हासिल की। साल 1994 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास की और आईपीएस बन गए। वह गाजियाबाद और नोएडा के एएसपी भी रह चुके हैं। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद साल 2000 में उनका कैडर उत्तराखंड कर दिया गया।

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