केदारनाथ में हेलीकॉप्टर सेवाओं के खिलाफ भैरव सेना का मोर्चा, मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

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मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।

वन विभाग रायपुर रेंज चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।

अपर यमुना वन प्रभाग चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वनों को अग्नि से सुरक्षा

वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान
वन विभाग अपील
जंगलों में आग को लेकर चेतावनी
जंगलों की आग रोकथाम
वन विभाग संदेश

केदारनाथ धाम में अनियंत्रित हेलीकॉप्टर सेवाओं के विरुद्ध ‘भैरव सेना संगठन’ ने खोला मोर्चा; मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन।
देहरादून।

​आज ‘भैरव सेना संगठन’ (देवभूमि भैरव वाहिनी) के तत्वावधान में केदारनाथ धाम की पौराणिक मर्यादा, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय युवाओं के रोजगार की रक्षा हेतु जिलाधिकारी के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन प्रेषित किया गया।

मुख्य वक्ता एवं संगठन के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि श्री केदारनाथ धाम केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। उन्होंने कहा, “व्यावसायिक लाभ के लिए संचालित हेलीकॉप्टर सेवाएं आज केदारघाटी के ग्लेशियरों और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए काल बन चुकी हैं। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जिससे ब्लैक कार्बन के कारण हमारे ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। यदि समय रहते इन उड़ानों पर प्रतिबंध नहीं लगा, तो हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को अपूरणीय क्षति पहुँचेगी।”

ज्ञापन कार्यक्रम का कुशल नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष संजीव टांक द्वारा किया गया। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि हेलीकॉप्टर सेवाओं के ‘शॉर्टकट’ ने हरिद्वार और ऋषिकेश से लेकर केदारनाथ तक के संपूर्ण व्यापारिक तंत्र को ध्वस्त कर दिया है। ट्रांसपोर्टर, होटल व्यवसायी, ढाबा संचालक और स्थानीय घोड़ा-खच्चर व डंडी-कंडी मजदूरों के पेट पर लात मारी जा रही है। छह माह की इस यात्रा पर निर्भर हजारों परिवारों का भरण-पोषण अब संकट में है।

देहरादून जिले में इस सफल आयोजन की कमान जिला महासचिव नेहा भंडारी ने संभाली। कार्यक्रम में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिनमें मुख्य रूप से कल्पना भंडारी, गीता नौटियाल, राजकुमार, राहुल सूद, हर्ष सूद, योगेश और गणेश जोशी उपस्थित रहे।

संगठन की मुख्य मांगें:
​केदारनाथ कस्तूरी मृग अभ्यारण्य क्षेत्र में एनजीटी के नियमों का सख्ती से पालन हो और शोर का ऑडिट कराया जाए।
​ग्लेशियरों की सुरक्षा हेतु हेलीकॉप्टर उड़ानों की संख्या पर तत्काल ‘कैपिंग’ (सीमा) लगाई जाए।

हरिद्वार से केदारनाथ मार्ग के पारंपरिक व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और स्थानीय सेवा प्रदाताओं (घोड़ा-खच्चर, पालकी) के रोजगार को प्राथमिकता देने हेतु विशेष नीति बने।

​भैरव सेना संगठन ने स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि यदि सरकार ने स्थानीय युवाओं के स्वरोजगार और देवभूमि के पर्यावरण की रक्षा हेतु ठोस कदम नहीं उठाए, तो संगठन पूरे उत्तराखंड में उग्र जन-आंदोलन शुरू करेगा।

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