मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।
जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।
जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।
देहरादून।
राज्य में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर राजनीतिक पोस्टर-बैनर लगाने पर अब कड़ी कार्रवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट समिति की सिफारिश के बाद सरकार ने साफ किया है कि ट्रैफिक साइन बोर्ड को ढकना मोटर व्हीकल एक्ट 1988 का उल्लंघन है, जिस पर 6 महीने तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। अधिकारियों को सख्ती से नियम लागू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सड़क हादसों को रोका जा सके और जनसुरक्षा सुनिश्चित हो।
उत्तराखंड में सड़कों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर राजनीतिक पोस्टर-बैनर लगाने की परंपरा अब भारी पड़ सकती है। कार्यकर्ताओं द्वारा नेताओं के जन्मदिन, पदोन्नति या उपलब्धियों पर लगाए जाने वाले होर्डिंग्स अब सीधे कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ गए हैं।
दरअसल, सड़क सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की समिति ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर इस प्रवृत्ति पर सख्त चिंता जताई है। समिति ने साफ कहा है कि ट्रैफिक साइन बोर्ड को ढकना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह आम लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा भी है।
साइन बोर्ड की अनदेखी बन सकती है जानलेवा
सड़क किनारे लगे संकेतक वाहन चालकों को दिशा, गति सीमा और संभावित खतरों की जानकारी देते हैं। लेकिन जब इन्हें पोस्टर या फ्लेक्स से ढक दिया जाता है, तो उनकी दृश्यता खत्म हो जाती है।
इस लापरवाही के कारण ड्राइवर समय रहते संकेत नहीं देख पाते और दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
बेतरतीब पोस्टरों से बढ़ रहा खतरा
राज्य के कई हिस्सों में देखा गया है कि राजनीतिक पोस्टर और बैनर बिना किसी नियम के लगाए जाते हैं। कई बार ये सीधे साइन बोर्ड के ऊपर या आसपास लगाए जाते हैं, जिससे ट्रैफिक संकेत पूरी तरह छिप जाते हैं। यही अव्यवस्था सड़क हादसों की एक बड़ी वजह बन रही है।
कानून सख्त, सजा का भी प्रावधान
समिति के अध्यक्ष जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह कृत्य मोटर व्हीकल एक्ट 1988 का उल्लंघन है। नियमों के तहत साइन बोर्ड को बाधित करने या ढकने पर 6 महीने तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
अधिकारियों को सख्ती के निर्देश
राज्य सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट आदेश जारी कर इस पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें। इसका संकेत साफ है कि अब इस तरह की गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
सड़क हादसों के चिंताजनक आंकड़े
उत्तराखंड में 1 जनवरी 2026 से अब तक सड़क हादसों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं।
कुल मौतें: 68
कुल घायल: 234
लापता: 4
देहरादून, पिथौरागढ़ और टिहरी जैसे जिलों में हादसों के मामले ज्यादा सामने आए हैं, जो सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं।
जिम्मेदारी से ही बचेगी जान
यह मुद्दा केवल पोस्टर हटाने का नहीं, बल्कि जनसुरक्षा का है। राजनीतिक समर्थन जताने के तरीके ऐसे नहीं होने चाहिए, जिससे आम लोगों की जान खतरे में पड़े।
प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन निर्देशों को जमीनी स्तर पर लागू करने की है। यदि सख्ती बरती गई, तो सड़कों पर अव्यवस्था कम होगी और हादसों में भी कमी आ सकती है।
आखिरकार, सड़क सुरक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है और छोटे नियमों का पालन ही बड़े हादसों को रोक सकता है।
