“न्यूड पोस्टर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ही लगाया — ‘बलात्कारियों को स्वीकार नहीं’”

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मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।

वन विभाग रायपुर रेंज चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।

अपर यमुना वन प्रभाग चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वनों को अग्नि से सुरक्षा

वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान
वन विभाग अपील
जंगलों में आग को लेकर चेतावनी
जंगलों की आग रोकथाम
वन विभाग संदेश

राजस्थान के बाड़मेर जिले में कांग्रेस नेता मेवाराम जैन की घर वापसी की घोषणा के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसमें अचानक शहर की कई जगह उनके नाम के साथ अश्लील पोस्टर चस्पा पाए गए, जिनमें “न्यूड” अश्लीलतम चित्र सहित संदेश लिखे थे। इस मामले पर पार्टी में अंदरूनी लड़ाई भी सतह पर आ गई है।

मेवाराम जैन के समर्थकों और विरोधियों के बीच पहले से ही खींचतान मानी जा रही थी। जैन की कांग्रेस में शामिल होने की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही विरोधी गुटों ने पोस्टरों के माध्यम से तीखा हमला किया। इन पोस्टरों में लिखा गया कि “हम बलात्कारियों को स्वीकार नहीं करते” — इस प्रकार विरोधी गुटों ने जैन पर गंभीर आरोप लगाने की कोशिश की।

विफल प्रयासों को छिपाने की बजाय, कांग्रेस के ही कुछ कार्यकर्ताओं ने बाद में खुलासा किया कि पोस्टर उन्हीं ने लगवाए थे, ताकि यह दिखाया जा सके कि पार्टी में यह भावना व्यापक है। उनका कहना है कि यह एक तरह का जन प्रेषण (mass messaging) था, जिससे यह बताया जाना था कि पार्टी “बलात्कारियों को स्वीकार नहीं करेगी” — यानी यह उत्सर्जन पैमाने पर मनाया जाना चाहिए था।

इस खुलासे ने राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी है। विरोधी दलों ने इसे प्रचार-प्रसार की एक चालाकी करार दिया, जबकि कांग्रेस भीतर टूट की समस्या से जूझती दिखाई दे रही है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की पोस्टरबाज़ी से कांग्रेस की छवि को और क्षति हो सकती है, क्योंकि जनता ऐसे हथकंडों का पहले ही विरोध करती रही है।

आगामी दिनों में यह देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस इस विवाद को कैसे संभालेगी — क्या पार्टी विरोधी गुटों को शांत कर पाएगी, या यह संघर्ष आगामी चुनावी राजनीति में और भी अधिक तीव्र होगा?

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