मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।
जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।
जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।
दरगाह में ड्यूटी फेरबदल के बाद बढ़ी हलचल, ‘मलाईदार जिम्मेदारियों’ को लेकर शुरू हुई पैरवी
नई व्यवस्था लागू होते ही सक्रिय हुए रसूखदार, प्रबंधन कार्यालय से लेकर देहरादून तक पहुंची सिफारिशों की गूंज
रिपोर्ट शाहनवाज खान
पिरान कलियर। दरगाह प्रशासन द्वारा व्यवस्थाओं में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से जारी किए गए नए ड्यूटी चार्ट के बाद प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विभिन्न अनुभागों में वर्षों से तैनात कर्मचारियों और सुपरवाइजरों की जिम्मेदारियों में बदलाव किए जाने के बाद अब पर्दे के पीछे पैरवी और दबाव की राजनीति शुरू होने की चर्चाएं सामने आ रही हैं।
जानकारी के अनुसार दरगाह प्रशासन ने हाल ही में नई ड्यूटी सूची जारी कर कई कर्मचारियों और सुपरवाइजरों को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इस फेरबदल का उद्देश्य व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाना, कार्यों में पारदर्शिता लाना और जायरीनों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना बताया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत लंगर संचालन, दुकानों से राजस्व वसूली, वीआईपी प्रबंधन, विद्युत एवं जल आपूर्ति, सफाई व्यवस्था तथा लेखा संबंधी कार्यों का पुनर्वितरण किया गया है।
हालांकि नई सूची जारी होते ही कुछ महत्वपूर्ण और प्रभावशाली मानी जाने वाली जिम्मेदारियों को लेकर असंतोष की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। सूत्रों का दावा है कि लंबे समय से विशेष स्थानों पर कार्यरत कुछ कर्मचारी और उनके समर्थक इस बदलाव से संतुष्ट नहीं हैं। यही कारण है कि आदेश जारी होने के तुरंत बाद प्रबंधन कार्यालय और उच्च स्तर तक लगातार संपर्क साधे जाने की खबरें सामने आने लगीं।
सूत्रों के मुताबिक कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा अपने पसंदीदा कर्मचारियों और सुपरवाइजरों को पुनः पूर्ववत जिम्मेदारियां दिलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इसके लिए प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी पैरवी की जा रही है। दरगाह प्रबंधन कार्यालय में लगातार फोन कॉल, सिफारिशें और संदेश पहुंचने की चर्चाएं कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
दरअसल दरगाह में कुछ जिम्मेदारियां ऐसी मानी जाती हैं, जिनका सीधा संबंध बड़ी संख्या में आने वाले जायरीनों, दुकानदारों, ठेकेदारों और विभिन्न व्यवस्थागत गतिविधियों से होता है। इन्हीं जिम्मेदारियों को कर्मचारी वर्ग में आमतौर पर “मलाईदार ड्यूटी” के रूप में देखा जाता है। ऐसे पदों पर तैनाती को लेकर पहले भी खींचतान और प्रतिस्पर्धा की चर्चाएं होती रही हैं।
दरगाह से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि प्रशासन ने सुधार और पारदर्शिता के उद्देश्य से ड्यूटी रोटेशन लागू किया है तो उसे बिना किसी बाहरी दबाव के प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि लंबे समय तक एक ही व्यक्ति के पास एक जैसी जिम्मेदारी रहने से निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं। ऐसे में समय-समय पर ड्यूटी परिवर्तन प्रशासनिक दृष्टि से आवश्यक माना जाता है।
वहीं कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा है कि नई व्यवस्था लागू होने से कई पुराने समीकरण प्रभावित हुए हैं, जिसके चलते कुछ लोग अपने प्रभाव और संपर्कों का इस्तेमाल कर आदेशों में बदलाव कराने की कोशिश कर रहे हैं।
अब सबकी निगाहें दरगाह प्रशासन और उच्च अधिकारियों पर टिकी हुई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि व्यवस्थाओं में सुधार और पारदर्शिता के उद्देश्य से जारी किए गए आदेश अपने मूल स्वरूप में लागू रहते हैं या फिर रसूख और सिफारिशों के दबाव में उनमें कोई नया फेरबदल देखने को मिलता है।
फिलहाल दरगाह के प्रशासनिक गलियारों में एक ही सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है—क्या सुधार और पारदर्शिता की यह पहल सफल होगी, या फिर ‘मलाईदार जिम्मेदारियों’ की दौड़ एक बार फिर व्यवस्था पर भारी पड़ जाएगी?
