हरीद्वार भूमि घोटाला: दो आईएएस और एक पीसीएस अधिकारी पर विभागीय जांच शुरू, आईपीएस अधिकारी को सौंपा गया नेतृत्व

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मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।

वन विभाग रायपुर रेंज चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।

अपर यमुना वन प्रभाग चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वनों को अग्नि से सुरक्षा

वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान
वन विभाग अपील
जंगलों में आग को लेकर चेतावनी
जंगलों की आग रोकथाम
वन विभाग संदेश

उत्तराखंड सरकार ने हरीद्वार भूमि घोटाले में संलिप्तता के आरोप में दो वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों और एक राज्य सिविल सेवा (पीसीएस) अधिकारी को निलंबित कर दिया है। इस मामले में एक विभागीय जांच शुरू की गई है, जिसमें आईपीएस अधिकारी रचित जुएल को जांच का नेतृत्व सौंपा गया है।

यह घोटाला हरीद्वार नगर निगम द्वारा सराई गांव में लगभग 33 बीघा भूमि की खरीद से संबंधित है, जिसे ₹54 करोड़ में खरीदी गई, जबकि इसकी बाजार मूल्य ₹14 करोड़ के आसपास थी। यह अनियमितता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को जन्म देती है।

उत्तराखंड सरकार ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए सभी संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले में शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाते हुए सभी जिम्मेदार अधिकारियों को कड़ी सजा देने की बात की है।

इस घोटाले की जांच में शामिल अधिकारियों में हरिद्वार के जिला मजिस्ट्रेट कर्मेंद्र सिंह, पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी और उप-मंडल मजिस्ट्रेट अजयवीर सिंह शामिल हैं। इन अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है, और यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में एक विशेष ऑडिट भी शुरू किया गया है, जिसमें पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी के कार्यकाल के दौरान किए गए सभी कार्यों की जांच की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसी अनियमितताएं न हों और सरकारी धन का सही उपयोग हो।

उत्तराखंड सरकार की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि राज्य में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और सभी अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का पालन ईमानदारी से करना होगा।

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