मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।
जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।
जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता एडवोकेट संदीप मोहन चमोली ने बद्रीनाथ मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए तथा जांच उच्च न्यायालय की निगरानी या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
भगवान बद्री विशाल की पावन नगरी में मंदिर के चढ़ावे एवं धन से जुड़ी सामने आई कथित अनियमितताओं की खबरों ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी ठेस पहुँचाई है। यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं, बल्कि देश-विदेश में बसे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और उत्तराखंड की प्रतिष्ठा से जुड़ा विषय है।
यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका इस प्रकरण में पाई जाती है, तो उसका नाम सार्वजनिक किया जाना चाहिए और उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। किसी भी दोषी को उसके पद या प्रभाव के आधार पर संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
वर्तमान में गठित जांच समिति में यदि मंदिर समिति से जुड़े अधिकारी या कर्मचारी शामिल हैं, तो इससे निष्पक्षता को लेकर स्वाभाविक प्रश्न उठते हैं। ऐसे में केवल विभागीय जांच से जनता का विश्वास बहाल होना कठिन होगा। इसलिए इस पूरे प्रकरण की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त अथवा वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में, अथवा किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से कराई जानी चाहिए, ताकि सत्य सामने आए और दोषियों को कानून के अनुसार दंड मिल सके।
यह भी आवश्यक है कि जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, जिससे श्रद्धालुओं और प्रदेशवासियों का विश्वास पुनः स्थापित हो सके। देवभूमि उत्तराखंड की पहचान उसकी धार्मिक आस्था, पारदर्शिता और ईमानदार व्यवस्था से है। यदि इस प्रकार के मामलों में कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे पूरे देश में राज्य की छवि धूमिल होगी।
हमारी स्पष्ट मांग है कि:
1. पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
2. जांच की निगरानी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अथवा किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा कराई जाए।
3. दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
4. जांच रिपोर्ट एवं कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
देवभूमि की आस्था से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उत्तराखंड की जनता और करोड़ों श्रद्धालु सत्य एवं न्याय की अपेक्षा रखते हैं। जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसे कानून के अनुसार कठोरतम दंड मिलना चाहिए।
