देहरादून में रेंजर के पद पर बदलाव बना चर्चा का विषय

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मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।

वन विभाग रायपुर रेंज चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।

अपर यमुना वन प्रभाग चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वनों को अग्नि से सुरक्षा

वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान
वन विभाग अपील
जंगलों में आग को लेकर चेतावनी
जंगलों की आग रोकथाम
वन विभाग संदेश

देहरादून। उत्तराखंड वन महकमे में तबादलों को लेकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर हुआ होमवर्क हर किसी को हैरान कर रहा है। पहले राजाजी टाइगर रिजर्व में निदेशक का पद और अब देहरादून में रेंजर के पद पर बदलाव चर्चा का विषय बना हुआ है। उत्तराखंड वन मुख्यालय ने रेंजर्स के तबादले से जुड़ा आदेश जारी किया है। इसमें 6 रेंजर्स की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। हालांकि चर्चा देहरादून के रेंजर पद पर हुए बदलाव को लेकर हो रही है।

हरीश थपलियाल को बदरीनाथ वन प्रभाग से चकराता वन प्रभाग भेजा गया है। संजय कुमार को रुद्रप्रयाग वन प्रभाग से टौंस वन प्रभाग की जिम्मेदारी मिली है। गंभीर सिंह धमानंदा को देहरादून वन प्रभाग से केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग की जिम्मेदारी दी गई है। शिव प्रसाद गैरोला को मसूरी वन प्रभाग से चकराता वन प्रभाग भेजा गया है। लक्ष्मण सिंह मार्ताेलिया को रुद्रप्रयाग वन प्रभाग से हल्द्वानी वन प्रभाग भेजा गया है।

विनोद चौहान को चकराता वन प्रभाग से रुद्रप्रयाग वन प्रभाग भेजा गया है। वैसे तो सभी तबादलों को जनहित में ही किया गया है, लेकिन रेंजर्स के बीच देहरादून के रेंजर गंभीर सिंह को लेकर चर्चा है। दरअसल गंभीर सिंह करीब 7 महीने पहले ही यमुना सर्किल से शिवालिक सर्किल में स्थानांतरित होकर देहरादून डिवीजन आए थे। 7 महीने में ही उनका दूसरी बार तबादला कर दिया गया। खास बात ये है कि उनके बदले किसी को देहरादून डिवीजन नहीं भेजा गया।

तबादलों को लेकर यह अधूरा होमवर्क है या कुछ और, यह तो कहा नहीं जा सकता लेकिन तबादले की सूची से पहले ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर निर्णय क्यों नहीं लिया जाता, यह एक बड़ा सवाल जरूर है। राजाजी टाइगर रिजर्व में भी यही स्थिति दिखाई दे रही है। सिविल सर्विस बोर्ड की बैठक होने के बाद इंडियन फॉरेस्ट सर्विस के अफसरों की तबादला सूची तो जारी कर दी गई, लेकिन राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पद पर कोई निर्णय नहीं हुआ।

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