मासूम बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी को मिली 20 साल की सजा

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वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।

वन विभाग रायपुर रेंज चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।

अपर यमुना वन प्रभाग चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वनों को अग्नि से सुरक्षा

वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान
वन विभाग अपील
जंगलों में आग को लेकर चेतावनी
जंगलों की आग रोकथाम
वन विभाग संदेश

ऋषिकेश क्षेत्र में आठ साल की बच्ची के साथ यौन अपराध मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने फैसला सुनाया ।

आरोपी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई और 1 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया  है। जुर्माना जमा नहीं करने पर उसे दो साल अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/एफटीएससी (पॉक्सो), देहरादून की अदालत ने सुनाया।

ऋषिकेश निवासी एक व्यक्ति ने 1 जुलाई 2025 को कोतवाली ऋषिकेश में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी आठ वर्षीय बेटी अचानक लापता हो गई है। काफी तलाश के बाद चुंगी क्षेत्र स्थित शौचालय के पास रोने की आवाज सुनकर अंदर जाकर देखा तो एक व्यक्ति निर्वस्त्र अवस्था में मौजूद था। बच्ची ने अपने पिता को बताया कि वह शौच करने गई थी और वहां एक व्यक्ति ने उसके साथ गलत काम किया। लोगों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

जांच के बाद 2 जुलाई 2025 को मुकदमा दर्ज किया गया, जबकि 29 अगस्त 2025 को चार्जशीट दाखिल की गई और 27 अक्टूबर 2025 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए गए। सुनवाई के दौरान पीड़िता, उसके पिता, स्कूल के प्रधानाध्यापक, चिकित्सक, विवेचक और पुलिसकर्मियों समेत छह गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अदालत ने पीड़िता की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई गई पहचान और स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज 26 अप्रैल 2017 की जन्मतिथि को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना तथा घटना के समय उसे नाबालिग माना।

अदालत ने आरोपी को BNS की धारा 137(2) के आरोप से बरी कर दिया, लेकिन BNS की धारा 65 (2) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5 (ड)/6 के तहत दोषी करार दिया।

मिली जानकारी के अनुसार, अदालत ने दोनों धाराओं के तहत 20-20 साल के कठोर कारावास और 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

अदालत ने पीड़िता को 3 लाख रुपये प्रतिकर देने का आदेश भी दिया है और इस संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देहरादून को नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

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