मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।
जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।
जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।
पूरे देश में करवा चौथ का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं।
इतिहास और महत्व:
करवा चौथ का व्रत प्राचीन भारतीय परंपरा का हिस्सा है। माना जाता है कि यह व्रत सबसे पहले राजाओं और रानियों के बीच प्रचलित हुआ, जहाँ रानियों ने अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए उपवास और पूजा की। कथा के अनुसार, प्रसन्न चांद देखकर व्रत खोलने पर पति और पत्नी दोनों के जीवन में सुख और समृद्धि आती है।
कैसे मनाया जाता है:
सुबह-सुबह महिलाएं सज-धज कर पूजा की तैयारी करती हैं। वे व्रत की कथा सुनती हैं, करवा (मिट्टी या धातु का पात्र) की पूजा करती हैं और दिनभर उपवास रखती हैं। शाम को चांद के दर्शन के बाद वे व्रत खोलती हैं। इस दिन खासकर महिलाएं लाल और पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेहंदी और कड़े लगाती हैं।
उत्सव:
शहरों में महिलाएं मंदिरों और पंडालों में पूजा करने पहुंची। बाजारों में पारंपरिक सजावट और खरीदारी का माहौल देखने को मिला। यह पर्व केवल व्रत रखने का नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, समर्पण और विश्वास को बढ़ाने का भी प्रतीक है।
