उत्तराखंड भर्ती परीक्षा पेपर लीक: केजरीवाल ने कहा – “युवा लगातार अन्याय का शिकार”

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मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।

वन विभाग रायपुर रेंज चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।

अपर यमुना वन प्रभाग चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वनों को अग्नि से सुरक्षा

वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान
वन विभाग अपील
जंगलों में आग को लेकर चेतावनी
जंगलों की आग रोकथाम
वन विभाग संदेश

देहरादून, 26 सितंबर 2025: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा आयोजित स्नातक स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा का पेपर लीक होने की खबर ने राज्य में युवाओं में भारी रोष पैदा कर दिया है। इस मामले पर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से तीखा बयान दिया है।

केजरीवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि “उत्तराखंड की भर्ती परीक्षा में पेपर लीक के खिलाफ हज़ारों युवा सड़कों पर हैं। कुछ दिन पहले लाखों युवाओं ने SSC की परीक्षाओं में धांधली के ख़िलाफ़ लंबा आंदोलन किया।” उन्होंने यह भी कहा कि यह समस्या केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है।

केजरीवाल ने केंद्र और राज्य सरकारों पर भी निशाना साधा। उनके अनुसार, “भाजपा की केंद्र सरकार हो, भाजपा की उत्तराखंड सरकार हो, या भाजपा की गुजरात सरकार हो, हर जगह पेपर लीक की वही कहानी है।” उन्होंने बताया कि यह केवल परीक्षा की निष्पक्षता को ही नहीं बल्कि युवा पीढ़ी के भविष्य को भी प्रभावित करता है।

उन्होंने यह भी जोर दिया कि सामान्य और गरीब परिवारों के करोड़ों युवा वर्षों तक परीक्षा की तैयारी करते हैं। गरीब माँ-बाप अपनी मुश्किल से कमाई हुई रकम को बच्चों की कोचिंग पर खर्च करते हैं, और आखिरकार उनके प्रयास पेपर लीक जैसी घटनाओं से अधर में लटक जाते हैं।

केजरीवाल ने देश के युवाओं से सवाल किया कि “देश का युवा क्या करे?” और कहा कि यह समय सिर्फ़ सरकारों पर सवाल उठाने का नहीं बल्कि सच्चाई और पारदर्शिता की लड़ाई के लिए एकजुट होने का है।

इस मामले ने उत्तराखंड में शिक्षा और भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। विपक्ष और छात्रों के संगठनों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

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