पिरान कलियर दरगाह में दुकान कब्जे को लेकर हंगामा, बिना नीलामी बदल गया खेल!

Spread the love

मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।

वन विभाग रायपुर रेंज चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।

अपर यमुना वन प्रभाग चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वनों को अग्नि से सुरक्षा

वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान
वन विभाग अपील
जंगलों में आग को लेकर चेतावनी
जंगलों की आग रोकथाम
वन विभाग संदेश

रूड़की।

पिरान कलियर दरगाह में दुकान नम्बर-3 को लेकर नया विवाद सामने आया है। दरगाह दफ्तर के कुछ कर्मचारियों पर बिना नीलामी प्रक्रिया पूरी किए दुकान पर दूसरे व्यक्ति को कब्जा दिलाने के आरोप लगे हैं। मामले को लेकर स्थानीय लोगों और पुराने दुकानदारों में नाराजगी देखी जा रही है, वहीं पूरे घटनाक्रम ने दरगाह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार मंगलवार को दरगाह दफ्तर में तैनात अकाउंटेंट सद्दाम हुसैन, सुपरवाइजर इंतेखाब आलम और कुछ पीआरडी कर्मी मौके पर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने पहले से दुकान चला रहे व्यक्ति को हटवाया और दूसरे व्यक्ति को दुकान पर बैठा दिया। इतना ही नहीं, मौके पर बर्तन, तख्त और अन्य सामान भी रखवाया गया, जिससे साफ संकेत मिला कि दुकान का कब्जा बदल दिया गया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस व्यक्ति को दुकान पर बैठाया गया, उसके नाम कोई नीलामी प्रक्रिया नहीं हुई थी। वहीं डेली बेसिस पर अस्थायी आवंटन की भी कोई आधिकारिक प्रक्रिया सामने नहीं आई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर दुकान नम्बर-3 पर यह “मेहरबानी” किसके इशारे पर की गई.?

मामले को लेकर जब दरगाह प्रबंधक एवं तहसीलदार विकास अवस्थी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि केवल किराया जमा न होने के चलते दुकान खाली कराने के निर्देश दिए गए थे। किसी दूसरे व्यक्ति को कब्जा दिलाने की जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि नियमों के विरुद्ध किसी को बैठाया गया है तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने बताया कि चारों दुकानों की नीलामी प्रक्रिया जल्द कराई जाएगी।

घटना के बाद दरगाह प्रशासन पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। क्या कुछ कर्मचारी खुद को दरगाह का “मिनी अफसर” समझकर फैसले लेने लगे हैं.? क्या बिना प्रशासनिक अनुमति सरकारी संपत्ति का कब्जा बदला जा सकता है.? या फिर इसके पीछे कोई अंदरूनी सेटिंग और मिलीभगत काम कर रही है.?

दरगाह की व्यवस्थाओं को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं, लेकिन इस ताजा मामले ने प्रशासनिक निगरानी पर फिर से बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन मामले में सिर्फ औपचारिक जांच करता है या फिर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई कर पारदर्शिता बहाल करने की कोशिश करेगा।

103 Views

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *