मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।
जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।
जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।
उत्तराखंड।
भारत का संविधान देश की आत्मा है। यह वह दस्तावेज़ है जिसने हर नागरिक को समान अधिकार, न्याय और सम्मान का वादा किया है। लेकिन आज कई राज्यों में जो हालात दिखाई दे रहे हैं, वे इस पवित्र संविधान की भावना के साथ खुला मज़ाक लगते हैं। जिन सरकारों को जनता ने सेवा के लिए चुना था, वही सरकारें अपनी जिम्मेदारियों से मुँह मोड़ती नजर आती हैं।
संविधान ने राज्य सरकारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था, रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जिम्मेदारी दी है। लेकिन आज कई जगह हालात ऐसे हैं कि स्कूलों में शिक्षक नहीं, अस्पतालों में डॉक्टर नहीं, युवाओं के पास रोजगार नहीं और आम जनता के लिए न्याय पाना मुश्किल होता जा रहा है। सवाल यह है कि जब मूलभूत जिम्मेदारियाँ ही पूरी नहीं हो रहीं, तो फिर सरकारें किस बात का शासन चला रही हैं?
दुर्भाग्य की बात यह है कि कई राज्य सरकारें जनता के मुद्दों से ज्यादा राजनीति के खेल में उलझी हुई हैं। कभी धर्म और जाति के नाम पर माहौल बनाया जाता है, तो कभी विरोधियों पर आरोप लगाकर असली मुद्दों से ध्यान भटका दिया जाता है। इससे लोकतंत्र कमजोर होता है और जनता के भरोसे के साथ धोखा होता है।
संविधान ने सरकारों को शक्ति इसलिए दी थी कि वे समाज के कमजोर वर्गों को ऊपर उठाएँ और देश को आगे बढ़ाएँ। लेकिन जब वही सरकारें सत्ता के अहंकार में जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करती हैं, तब यह साफ दिखाई देता है कि संविधान की मर्यादा का सम्मान नहीं किया जा रहा।
आज जरूरत है कि जनता भी जागरूक हो और अपने अधिकारों को पहचाने। सरकारें तभी जिम्मेदार बनेंगी जब जनता सवाल पूछेगी और जवाबदेही तय करेगी। लोकतंत्र केवल वोट डालने से मजबूत नहीं होता, बल्कि सत्ता से सवाल करने से मजबूत होता है।
अगर राज्य सरकारें सच में संविधान का सम्मान करना चाहती हैं, तो उन्हें दिखावे की राजनीति छोड़कर जनता के असली मुद्दों पर काम करना होगा। वरना इतिहास गवाह है कि जो सरकारें जनता और संविधान की भावना को भूल जाती हैं, उन्हें जनता ज्यादा समय तक सत्ता में नहीं रहने देती।
संविधान का सम्मान केवल भाषणों से नहीं, बल्कि ईमानदार काम से साबित होता है।
