मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।
जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।
जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।
स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब की अनुमति नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रा की याचिका खारिज की
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब या हेडस्कार्फ पहनने की अनुमति मांगने वाली एक नाबालिग मुस्लिम छात्रा की याचिका खारिज कर दी है।
कोर्ट ने कहा कि यदि किसी शैक्षणिक संस्थान का ड्रेस कोड सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होता है और वह भेदभावरहित है, तो कोई छात्र व्यक्तिगत पसंद के आधार पर यूनिफॉर्म में बदलाव की मांग नहीं कर सकता।
जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने के लिए पर्याप्त धार्मिक या कानूनी साक्ष्य पेश नहीं कर सकी कि सिर पर स्कार्फ पहनना इस्लाम की ऐसी आवश्यक धार्मिक प्रथा है, जिसके बिना धर्म का मूल स्वरूप प्रभावित होता है।
मामला प्रयागराज के अतरसुइया स्थित टैगोर पब्लिक स्कूल की छात्रा सुकैना रिजवी से जुड़ा है। छात्रा ने 10वीं कक्षा के बाद इसी स्कूल में 11वीं में प्रवेश लेने के लिए निर्धारित यूनिफॉर्म के साथ हेडस्कार्फ पहनने की अनुमति मांगी थी।
छात्रा का कहना था कि वह छठी से 10वीं कक्षा तक स्कूल में पढ़ी और इस दौरान हेडस्कार्फ पहनती रही, जिस पर स्कूल ने आपत्ति नहीं जताई। हालांकि, 11वीं में प्रवेश के समय स्कूल ने उसे हेडस्कार्फ छोड़ने के लिए कहा।
हाईकोर्ट ने कहा कि पहले स्कूल द्वारा हेडस्कार्फ पहनने पर आपत्ति नहीं करने से छात्रा को भविष्य में भी इसे पहनने का कोई कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। यदि स्कूल ने पहले ड्रेस कोड को सख्ती से लागू नहीं किया था, तो इससे वह भविष्य में अपने निर्धारित यूनिफॉर्म नियम लागू करने से नहीं रुकता।
कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले से सहमत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2022 में कर्नाटक हाईकोर्ट की फुल बेंच के हिजाब मामले के फैसले पर भी विचार किया। कोर्ट ने कहा कि उसे कर्नाटक हाईकोर्ट के इस निष्कर्ष से अलग राय रखने का कोई कारण नहीं दिखाई देता कि हिजाब को इस्लाम की आवश्यक धार्मिक प्रथा के रूप में स्थापित नहीं किया जा सका है।
अदालत ने कहा कि स्कूल का ड्रेस कोड छात्रों के बीच समानता, अनुशासन और संस्थान की पहचान बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया जाता है।
अलग छूट से यूनिफॉर्म की अवधारणा प्रभावित होगी
कोर्ट ने कहा कि यदि व्यक्तिगत आधार पर छात्रों को यूनिफॉर्म से अलग कपड़े या धार्मिक पहचान से जुड़ी वस्तुएं पहनने की अनुमति दी जाने लगे, तो इससे यूनिफॉर्म की मूल अवधारणा प्रभावित होगी।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जब स्कूल का ड्रेस कोड एकसमान, भेदभावरहित और अनुशासन व संस्थान की पहचान बनाए रखने के उद्देश्य से बनाया गया हो, तो निर्धारित यूनिफॉर्म लागू करने का अधिकार मुख्य रूप से शैक्षणिक संस्थान के पास है।
इन टिप्पणियों के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रा की रिट याचिका खारिज कर दी।
