मसूरी वन प्रभाग की ओर से सभी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।
जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।
जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।
वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।
यहां घटना का मामला ही पलट गया है। सारी नाकामियां उत्तर प्रदेश सरकार के सामने आ रही हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, मूर्ति का विसर्जन करने पहुंचे थे। जैसे ही लोग नदी में उतरे, 15 लोग अचानक गहरे पानी में डूब गए। 1 व्यक्ति को किसी तरह बचा लिया गया। 3 शव गुरुवार रात बरामद हुए, 2 शव शुक्रवार सुबह मिले। बाकी 7 लोगों की तलाश जारी है।
शुक्रवार रात 8:30 बजे करीब पांच मृतकों का अंतिम संस्कार भारी पुलिस बल की मौजूदगी में किया गया। हजारों ग्रामीणों की आंखों में आंसू थे। हर जुबान पर एक ही सवाल था: अगर अवैध खनन न होता, तो क्या ये जानें बच सकती थीं?
जनता का सीधा आरोप: शासन जिम्मेदार।
नदी में JCB मशीनों से खनन किया गया, जिससे गहरे-गहरे गड्ढे बन गए, जिनमें लोग डूब गए। आमतौर पर ऊटंगन जैसी छोटी नदियों में इतनी गहराई नहीं होती कि विसर्जन के दौरान लोग डूब जाएं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस पैसे लेकर खनन को नजरअंदाज करती है और कार्रवाई नहीं करती।
शुक्रवार आधे दिन से सेना और NDRF की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं। स्टीमर और गोताखोरों की मदद से सर्च ऑपरेशन चल रहा है। पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार, मंत्री जयवीर सिंह, सांसद राजकुमार चाहर, विधायक भगवान सिंह कुशवाह, जिलाध्यक्ष प्रशांत पोनिया, चेयरमैन सुधीर गर्ग गुड्डू व अन्य नेता मौके पर पहुंचे। पीड़ित परिवारों को सांत्वना दी जा रही है, पर गांव का गुस्सा शांत नहीं हो रहा।
गांव में आक्रोश, शासन-प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन
शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने ऊंटगिरि और कागारौल चौराहों पर जाम लगा दिया। एसडीएम की गाड़ी पर पथराव हुआ, जिससे शीशा टूट गया। पीएसी और भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं — क्या वे खनन रोक सकते थे या खेल ऊपर तक हैं?
क्या कहता है कानून और नीति?
उत्तर प्रदेश में नदियों में खनन के लिए सख्त नियम हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कुछ और ही है। बीजेपी शासन में खनन माफिया खुलेआम नियम तोड़ते हैं। कई बार प्रशासनिक मिलीभगत से अवैध खनन को बढ़ावा मिलता है। ऐसी घटनाएं राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों के लिए गंभीर चेतावनी हैं।
ऊटंगन नदी हादसा एक मानव निर्मित त्रासदी है, जिसमें प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और लालच ने जानें लीं। जब तक खनन माफियाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी और शासन-प्रशासन अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। क्या बाबा का बुलडोजर इन दोषियों पर भी गरजेगा? सवाल बहुत हैं, और जनता के बीच जाकर ही जमीनी हकीकत मालूम होती है।
