जच्चा-बच्चा मौत मामले में निशा नर्सिंग होम का लाइसेंस रद्द

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वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन क्षेत्राधिकार एवं समस्त स्टाफ, ऋषिकेश वन क्षेत्र_ऋषिकेश, देहरादून वन प्रभाग की ओर से वनाग्नि रोकथाम को लेकर संबंधित अपील द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान

वन विभाग रायपुर रेंज की ओर से जंगलों में लगने वाली आग को लेकर जारी की गई अपील।

वन विभाग रायपुर रेंज चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर वन प्रभाग मसूरी द्वारा जारी की गई चेतावनी।

अपर यमुना वन प्रभाग चेतावनी

जंगलों की आग को लेकर प्रभागीय वनाधिकारी, अपर यमुना वन प्रभाग, बड़कोट द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वनों को अग्नि से सुरक्षा

वनों को अग्नि से सुरक्षा हेतु कार्यालय प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ वन विभाग, गोपेश्वर द्वारा जारी की गई चेतावनी।

वन अग्नि सुरक्षा अभियान
वन विभाग अपील
जंगलों में आग को लेकर चेतावनी
जंगलों की आग रोकथाम
वन विभाग संदेश

देहरादून।

कांग्रेस नेताओं, समाजसेवियों और डीएवी छात्र प्रतिनिधियों के लगातार संघर्ष और पीड़ित परिवार को मिले जनसमर्थन का असर आखिरकार देखने को मिला। जच्चा-बच्चा की मौत के चर्चित मामले में जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निशा नर्सिंग होम का लाइसेंस रद्द कर दिया है। हालांकि पीड़ित परिवार और आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक दोषी डॉक्टरों और स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।

बसंत विहार स्थित निशा नर्सिंग होम की कथित लापरवाही से जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर गुरुवार को प्रेस क्लब देहरादून में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। समाजसेवी फारूक राव, छात्रसंघ अध्यक्ष ऋषभ मल्होत्रा और छात्रसंघ महासचिव करण नेगी ने पीड़ित परिवार को अपना समर्थन देते हुए दोषी डॉक्टरों और स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी देहरादून द्वारा गठित जांच समिति ने मामले की जांच के बाद 23 जून 2026 को निशा नर्सिंग होम का लाइसेंस रद्द कर दिया है।

हालांकि, अब तक नर्सिंग होम के डॉक्टरों और स्टाफ के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव कर उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।

इस दौरान एक अन्य पीड़ित परिवार ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचकर अपना समर्थन दिया और अपने मामले की दोबारा जांच की मांग उठाई। परिवार का आरोप है कि वर्ष 2024 में उनकी गर्भवती पत्नी अपूर्वा राव का इलाज भी इसी नर्सिंग होम में चल रहा था। हालत बिगड़ने पर उन्हें दूसरे अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनकी मृत्यु हो गई। मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई थी और जांच प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। पीड़ित परिवार का कहना है कि उनकी शिकायत की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

प्रेस वार्ता में कहा गया कि निकिता मीना और उनके नवजात बच्चे को न्याय दिलाने की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक दोषी डॉक्टरों और स्टाफ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं हो जाती। वक्ताओं ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के मामलों को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।

इस अवसर पर समाजसेवी फारूक राव, छात्रसंघ अध्यक्ष ऋषभ मल्होत्रा, छात्रसंघ महासचिव कारण नेगी सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

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